खाना कहाँ बैठ कर खाना चाहिए

खाना कहाँ बैठ कर खाना चाहिए :- 

हर घर में खाने का अपना अलग स्थान होता है | खाने के स्थान का भी वास्तु में अपना बहुत महत्वपूर्ण रोल होता है | यदि खाने की जगह भी वास्तु के अनुसार हो तो वहाँ किसी चीज की कोई कमी नहीं रहती और यदि खाना उचित जगह पर बैठ कर न खाया जाये तो ये बहुत  सारी बीमारियों को निमंत्रित भी कर सकता है,घर का माहौल ख़राब कर सकता है, घर में अशांति पैदा कर सकता है, घर में क्लेश करवा सकता है,घर में आमदनी के स्त्रोत को खत्म कर सकता है | इन सब बातों से बचने के लिए हमने अपने खाने की जगह को भी उचित दिशा और उचित ढंग से बनाना चाहिए | 


किस दिशा में होना चाहिए :-

वास्तु के अनुसार भोजन करने का स्थान घर की पश्चिम दिशा में अच्छा माना गया है | यदि पश्चिम में नहीं बना सकते तो इसको उत्तर या पूर्व में भी बनाया जा सकता हैं | यदि रसोई के अंदर ही खाने की जगह बनाये तो वो पश्चिम दिशा में होनी चाहिए | क्योकि पश्चिम दिशा में बैठ कर भोजन करने से सुख शांति एवं संतोष मिलता है | 


कुछ महत्वपूर्ण बातें :-

* यदि घर में भोजन कक्ष नहीं हो तो जिस भी कक्ष में बैठकर भोजन करते हो उस कक्ष की पश्चिम दिशा में बैठ कर भोजन करना चाहिए |
* अपने घर में साफ -सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए और जिस जगह पर बैठ कर खाते हैं उसकी सफाई तो बहुत जरुरी हो जाती हैं | 
*  भोजन कक्ष का दरवाजा पूर्व ,पश्चिम या उत्तर दिशा की ओर होना ही होना चाहिए | 
* खाने वाली मेज (Dining Table ) आयताकार या वर्गाकार ही होनी चाहिए | गोलाकार, अंडाकार या किसी और प्रकार की नहीं होनी चाहिए | 


* भोजन की मेज किसी दीवार के साथ सटाकर नहीं रखनी चाहिए, इसको बीच में या कक्ष के पश्चिम की दिशा की तरफ रखना उचित माना गया है | 
* भोजन कक्ष के ईशान कोण यानि उत्तर -पूर्व की दिशा में पानी जरूर चाहिए | 
*  भोजन कक्ष का दरवाजा और घर का मुख्य दरवाजा आमने सामने बिल्कुल भी नहीं होने चाहिए | 
* भोजन कक्ष के आस -पास शौचालय किसी भी हालत में नहीं होना चाहिए | 
* इस कमरे में वॉश -बेसिन और सिंक उत्तर या पूर्व दिशा में ही रखने चाहिए तथा फ्रीज़ और अन्य तैयार सामान पश्चिम दिशा में रखनी चाहिए |  


क्या सावधानी रखें :- 

* कई घरों में रसोईघर निचे की मंजिल पर बना होता है और भोजन करने का रूम ऊपर की मज़िलों पर होता है, ऐसे नहीं होना चाहिए | क्योकि ये स्वास्थ्य के हिसाब से अच्छा नहीं होता ,इसके कारण पेट से सम्बंधित रोग होना शुरू हो जाते हैं | 
* किसी होटल या रेस्टोरेंट आदि में भी यदि ऐसा है तो वहाँ खाना ऊपर ले जाते समय खाने को ढक कर ले जाना चाहिए और आग्नये कोण यानि पूर्व -दक्षिण की दिशा में भोजन की आहुति देकर फिर  भोजन खाना चाहिए | 
* जब भी भोजन किया जाये उससे पहले भगवान को नमस्कार करके तथा मन ही मन कुछ भोजन जीव -जन्तुओ के लिए निकाल कर फिर खाना शुरू करना चाहिए | 
* भोजन की मेज पर खाना खाते हुए घर के मुखिया का मुँह पूर्व की दिशा में तथा घर के अन्य सदश्यो का मुख उत्तर या पश्चिम दिशा में कभी भी नहीं होना चाहिए |
* खाना खाने के बाद भगवान (अन्न देवता ) को धन्यवाद देना कभी नहीं भूलना चाहिए |

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